पवित्रशास्त्र
अलमा 37


अध्याय 37

आत्माओं के उद्धार के लिए पीतल की पट्टियों और अन्य धर्मशास्त्रों को बचाया जाता है—येरेदाइयों को उनकी दुष्टता के कारण नष्ट किया जाता है—उनके गुप्त शपथ और अनुबंधों को लोगों से बचाकर रखना चाहिए—अपने सारे कार्यों में प्रभु से सलाह लें—जैसा कि लियाहोना ने नफाइयों का मार्गदर्शन किया था उसकी प्रकार मसीह अनंत जीवन के लिए लोगों का मार्गदर्शन करता है । लगभग 74 ई.पू.

1 और अब, मेरे बेटे हिलामन, मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि तुम उन अभिलेखों को ले लो जिसे मुझे सौंपा गया है;

2 और मैं तुम्हें यह भी आज्ञा देता हूं कि तुम इन लोगों का अभिलेख रखो, नफी की पट्टियों पर जैसा कि मैंने रखा है, और इन सारी चीजों को मेरे समान ही पवित्र रखो जिसे मैंने रखा है; क्योंकि इन्हें किसी सही उद्देश्य के लिए रखा गया है ।

3 और पीतल की ये पट्टियां जिन पर इन्हें अंकित किया गया है, जो कि पवित्र धर्मशास्त्रों का अभिलेख हैं, जो आरंभ से लेकर हमारे पूर्वजों की वंशावली है—

4 देखो, इसकी भविष्यवाणी हमारे पूर्वजों द्वारा की गई है, कि उन्हें रखना चाहिए और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपना चाहिए, और ये तब तक प्रभु के हाथों द्वारा बचाकर रखी जाएंगी जब कि यह हर राष्ट्र, जाति, भाषा, और लोगों में न पहुंच जाए, ताकि वे उसमें शामिल भेदों को जानेंगे ।

5 और अब देखो, यदि इन्हें रखा जाता है तो इनकी चमक को बनाए रखना चाहिए; हां, और वे उनकी चमक को बनाए रखेंगे; हां, और वे पट्टियां भी पवित्र होंगी जिन पर इन्हें अंकित किया गया है ।

6 अब तुम मान सकते हो कि यह मेरी मूर्खता है; परन्तु देखो मैं तुमसे कहता हूं, कि छोटी और साधारण बातों से ही बड़ी बातें होती हैं; और कभी-कभी छोटे माध्यम ज्ञानी को भ्रम में डाल देते हैं ।

7 और प्रभु परमेश्वर अपने महान और अनंत उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किसी न किसी माध्यम से काम करता है; और छोटे-छोटे माध्यमों से प्रभु ज्ञानी को भ्रम में डालता है और कई आत्माओं के लिए उद्धार लाता है ।

8 और अब, परमेश्वर में यह ज्ञान अभी तक रहा है कि इन चीजों को बचाकर रखना चाहिए; क्योंकि देखो, इससे इन लोगों की बुद्धि बढ़ी है, हां, और कई लोगों ने इससे अपनी भूल को माना है, और अपनी आत्माओं के उद्धार के प्रति स्वयं में अपने परमेश्वर का ज्ञान बढ़ाया है ।

9 हां, मैं तुमसे कहता हूं, इन पट्टियों पर लिखी हुईं ये बातें नहीं होतीं जो कि इन पट्टियों पर हैं तो अम्मोन और उसके भाई उन कई हजार लमनाइयों को उनके पूर्वजों की गलत परंपरा को नहीं मनवा पाते; हां, इन अभिलेखों और इन बातों के कारण ही उन्होंने पश्चाताप किया; जिससे उनमें उनके प्रभु परमेश्वर का ज्ञान बढ़ा, और उन्होंने अपने मुक्तिदाता यीशु मसीह में आनंद मनाया ।

10 और कौन जानता है कि क्या उनमें से हजारों लोगों को, हां, और हमारे कई हजार उन हठी, नफाई भाइयों को, अपने मुक्तिदाता के ज्ञान में लाने का वे साधन बन पाएंगे, जो कि इस समय पाप और दुष्टता में अपने हृदयों को कठोर किये जा रहे हैं ?

11 अब इन भेदों को अभी पूरी तरह से मुझ पर प्रकट नहीं किया गया है; इसलिए मैं धीरज रखूंगा ।

12 और मेरा इतना कहना ही पर्याप्त हो सकता है कि इन्हें एक सही उद्देश्य के लिए बचाकर रखा गया है, जो उद्देश्य परमेश्वर जानता है; क्योंकि वह अपने सभी कार्यों पर ज्ञान में सलाह देता है, और उसके मार्ग सीधे हैं और उसका मार्ग एक अनंत चक्र है ।

13 ओह याद रखो, मेरे बेटे हिलामन याद रखो, कि परमेश्वर की आज्ञाएं कितनी कड़ी हैं । और उसने कहा है: यदि तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे तो तुम प्रदेश में उन्नति करोगे—परन्तु यदि तुम उसकी आज्ञाओं का पालन नहीं करोगे तो तुम्हें उसकी उपस्थिति से अलग कर दिया जाएगा ।

14 और अब मेरे बेटे याद रखो कि परमेश्वर ने तुम्हें इन चीजों को सौंपा है जो कि पावन हैं, जिसे उसने पावन रखा है, और वह स्वयं में सही उद्देश्य के लिए इन्हें रखेगा और बचाएगा, ताकि वह अपना सामर्थ्य भावी पीढ़ियों को दिखा सके ।

15 और अब देखो, मैं भविष्यवाणी की आत्मा द्वारा तुमसे कहता हूं, कि यदि तुम परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन करते हो, देखो, जो ये चीजें पावन हैं उन्हें परमेश्वर के सामर्थ्य द्वारा तुमसे ले लिया जाएगा, और तुम्हें शैतान को सौंप दिया जाएगा, ताकि वह तुम्हें हवा के सामने भूसे के समान छान सके ।

16 परन्तु यदि तुम परमेश्वर की आज्ञाओं को मानते हो, और तुम इन पवित्र चीजों को वैसे ही करोगे जैसे कि प्रभु ने तुम्हें करने की आज्ञा दी है, (क्योंकि तुम्हें प्रभु से उन सारी चीजों को करने के लिए निवेदन करना चाहिए जिसे तुम्हें करना हो) देखो, धरती और नरक की कोई भी शक्ति तुमसे उन चीजों को नहीं छीन सकती है, क्योंकि अपनी सारी बातों को पूरा करने के लिए परमेश्वर सामर्थ्यवान है ।

17 क्योंकि वह तुमसे की गई अपनी सारी प्रतिज्ञाओं को पूरा करेगा, क्योंकि उसने उन सारी प्रतिज्ञाओं को पूरा किया है जो उसने हमारे पूर्वजों से की थीं ।

18 क्योंकि उसने उनसे प्रतिज्ञा की थी कि वह स्वयं में सही उद्देश्य के लिए इन्हें बचाएगा, ताकि वह अपना सामर्थ्य भावी पीढ़ियों को दिखा सके ।

19 और अब देखो, एक उद्देश्य को उसने पूरा किया है, यहां तक कि कई हजार लमनाइयों को सच्चाई का ज्ञान कराया है; और उसने उनमें अपना सामर्थ्य दिखाया है, और वह उनमें अपना सार्मथ्य भावी पीढ़ियों को भी दिखाएगा; इसलिए उन्हें बचाया जाएगा ।

20 इसलिए मेरे बेटे हिलामन, मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि मेरी सारी बातों को पूरा करने में तुम निष्ठावान रहो, और जैसा कि लिखा गया है, परमेश्वर की आज्ञाओं को मानने में भी निष्ठावान रहो ।

21 और अब, मैं उन चौबीस पट्टियों से संबंधित तुमसे बातें करूंगा, जिन्हें तुम रखोगे, कि भेद और अंधकार के कार्य, और उनके गुप्त कार्य, या उन लोगों के गुप्त कार्य जिन्हें खत्म कर दिया गया था, इन लोगों पर प्रकट किये जा सकें; हां, उनकी सारी हत्याएं और चोरी, और उनके लूट-मार, और उनकी सारी दुष्टताएं और घृणित कार्य, इन लोगों पर प्रकट किये जा सकें; हां, और यह कि तुम इन अनुवादकों को बचाकर रखोगे ।

22 क्योंकि देखो, प्रभु ने देखा था कि उसके लोग अंधकार में कार्य करने लगे, हां, गुप्त हत्याएं और घृणित कार्य; इसलिए प्रभु ने कहा था, यदि वे पश्चाताप नहीं करते हैं तो उन्हें धरती से नष्ट कर देना चाहिए ।

23 और प्रभु ने कहा था: मैं अपने सेवक गजेलम के लिए एक पत्थर बनाऊंगा जो अंधकार में भी प्रकाशित होगा, कि मैं उन लोगों को खोज सकूं जो मेरी सेवा करेंगे, ताकि मैं उन लोगों पर उनके भाइयों के कार्य को प्रकट कर सकूं, हां, उनके गुप्त कार्य, उनके अंधकार के कार्य, और उनकी दुष्टता और उनके घृणित कार्य को भी ।

24 और अब, मेरे बेटे, इन अनुवादकों को तैयार किया गया है ताकि परमेश्वर का वचन पूरा हो सके, जिसे उसने यह कहते हुए बताया था:

25 मैं उनके सारे गुप्त और घृणित कार्यों को अंधकार से प्रकाश में लाऊंगा; और यदि वे पश्चाताप नहीं करेंगे तो मैं उन्हें धरती से नष्ट कर दूंगा; और मैं हर एक राष्ट्र के लिए उनके गुप्त और घृणित कार्यों को प्रकाश में लाऊंगा जिनका इस समय से आगे प्रदेश पर अधिकार होगा ।

26 और अब, मेरे बेटे, हम देखते हैं कि वे पश्चाताप नहीं करते हैं; इसलिए उनका विनाश हो जाता है, और अब तक परमेश्वर का वचन पूरा होता है; हां, उनके गुप्त घृणित कार्यों को अंधकार से सामने लाया जाता है और हमें ज्ञात कराया जाता है ।

27 और अब, मेरे बेटे, मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि तुम उनके सारे वचनों, और उनके अनुबंधों, और गुप्त घृणित कार्यों के प्रति उनकी मंजूरी को बनाए रखना; हां, उनके सारे चिन्हों और अचम्भों को इन लोगों से दूर रखो, ताकि वे उन्हें जान न सकें, नहीं तो ये लोग भी अंधकार में गिर जाएंगे और इन्हें भी नष्ट कर दिया जाएगा ।

28 क्योंकि देखो, इस प्रदेश पर एक श्राप है, कि परमेश्वर के सामर्थ्य के अनुसार अंधकार का कार्य करनेवालों पर विनाश आएगा, जब उनके पापों का घड़ा भर चुका होगा; इसलिए मैं चाहता हूं कि इन लोगों का विनाश न हो ।

29 इसलिए, तुम्हें इन लोगों से उनके वचनों और अनुबंधों की गुप्त योजनाओं को छिपाकर रखना है, और उन्हें केवल तुम उनकी दुष्टता और उनकी हत्याओं और उनके धृणित कार्यों की जानकारी दोगे; और तुम उन्हें इस प्रकार की दुष्टता और घृणित कार्य और हत्याओं से घृणा करना सिखाओगे; और तुम उन्हें यह भी सिखाओगे कि इन लोगों का विनाश उनकी दुष्टता और घृणित कार्य और उनकी हत्याओं के कारण हुआ था ।

30 क्योंकि देखो, उन्होंने प्रभु के उन सभी भविष्यवक्ताओं की हत्या की थी जो उनके बीच उनके अधर्म से संबंधित घोषणा करने आए थे; और जिनकी हत्या उन्होंने की थी उनके लहू ने प्रभु अपने परमेश्वर को पुकारा था कि उन लोगों से प्रतिशोध लिया जाए जिन लोगों ने उनकी हत्या की है; और इस प्रकार अंधकार और गुप्त मेल-मिलाप के इन कार्य करनेवालों पर परमेश्वर का न्याय आया ।

31 हां, और वह प्रदेश और गुप्त मेल-मिलाप के उन कार्य करनेवालों पर सदा के लिए श्राप आए, यहां तक कि विनाश भी यदि उनके पापों का घड़ा भरने से पहले वे पश्चाताप नहीं करते हैं ।

32 और अब, मेरे बेटे, उन बातों को याद रखो जिसे मैंने तुम्हें बताया है; इन लोगों के प्रति उन गुप्त योजनाओं पर विश्वास मत करो, परन्तु उन्हें पाप और अधर्म के प्रति सदा ईर्ष्या करना सीखाओ ।

33 उन्हें पश्चाताप करना, और प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करना सीखाओ; उन्हें विनम्र होना और हृदय से विनम्र और दीन होना सीखाओ; उन्हें प्रभु यीशु मसीह पर उनके विश्वास के द्वारा शैतान के हर प्रलोभन का सामना करना सीखाओ ।

34 उन्हें सीखाओ कि कभी भी वे अच्छे कार्यों से न थकें, परन्तु हृदय से नम्र और दीन रहें; क्योंकि इसी प्रकार के लोगों को उनकी आत्माओं में आराम मिलेगा ।

35 ओह, मेरे बेटे, याद रखो, और अपनी युवावस्था में ज्ञान प्राप्त करो; हां, अपनी युवावस्था में परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना सीखो ।

36 हां, और अपनी सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारो; हां, तुम्हारे सारे कार्य प्रभु के लिए हों, और जहां कहीं भी तुम जाओ इसे प्रभु में होने दो; हां, अपने सारे विचार को प्रभु के प्रति निर्देशित होने दो; हां, अपने हृदय का स्नेह सदा के लिए प्रभु पर लगाए रखो ।

37 अपने सारे कार्यों में प्रभु से सलाह लो, और अच्छा करने के लिए वह तुम्हें निर्देश देगा; हां, जब तुम रात को सोते हो तो प्रभु में सोओ, ताकि सोते समय वह तुम्हारी रक्षा कर सके; और जब तुम सुबह उठते हो तो परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए तुम्हारा हृदय भरा होना चाहिए; और यदि तुम इन कार्यों को करते हो तो अंतिम दिन में तुम उत्कर्ष पाओगे ।

38 और अब, मेरे बेटे, मेरे पास उस चीज से संबंधित कुछ कहने के लिए है जिसे हमारे पूर्वज गेंद या निर्देशक कहते थे—या जिसे हमारे पूर्वज लियाहोना कहते थे, जिसकी यदि व्याख्या की जाए तो एक दिशासूचक यंत्र है; और प्रभु ने उसे बनाया था ।

39 और देखो, इतनी अनोखी कारीगरी कोई भी मनुष्य नहीं कर सकता है । और देखो, इसे हमारे पूर्वजों को उस मार्ग को दिखाने के लिए बनाया गया था जिस पर चलकर उन्हें निर्जन प्रदेश की यात्रा करनी थी ।

40 और परमेश्वर में उनके विश्वास के अनुसार इस चीज ने उनके लिए काम किया; इसलिए, मानने के लिए उनके पास विश्वास था कि जिस ओर उन्हें जाना था उसी तरफ परमेश्वर उन कांटों को धुरी पर घुमाएगा, देखो, ऐसा ही हुआ था; इसलिए उनके प्रति यह चमत्कार हुआ था, और दिन-ब-दिन परमेश्वर के सामर्थ्य द्वारा और भी कई चमत्कार हुए ।

41 फिर भी, क्योंकि वे चमत्कार छोटे साधन द्वारा किये गए थे तब भी वह उनके लिए महान कार्य दिखाता था । वे आलसी थे, और विश्वास और निष्ठा बढ़ाना भूल गए और फिर चमत्कार के वे कार्य बंद हो गए, और तब वे अपनी यात्रा में आगे नहीं बढ़ पाए;

42 इसलिए, वे निर्जन प्रदेश में ही रुक गए, या सीधी यात्रा नहीं कर पाए, और अपने उल्लंघन के कारण भूख और प्यास से पीड़ित हुए ।

43 और अब, मेरे बेटे, मैं चाहूंगा कि तुम समझो कि ये बातें प्रभाव छोड़े बिना नहीं रहतीं; क्योंकि हमारे पूर्वज इस दिशासूचक यंत्र पर ध्यान लगाने में आलसी थे (अब ये चीजें लौकिक थीं) वे समृद्ध नहीं हो पाए; ऐसा आत्मिक चीजों के साथ भी है ।

44 क्योंकि देखो, जिस प्रकार इस दिशासूचक यंत्र पर ध्यान लगाना हमारे पूर्वजों के लिए आसान था जो कि उन्हें प्रतिज्ञा की हुई भूमि पर सीधे जाने का संकेत करता था उसी प्रकार मसीह के वचन पर ध्यान देना भी आसान है जो तुम्हें अनंत स्वर्गसुख की तरफ सीधा संकेत करता है ।

45 और अब, मैं कहता हूं, क्या यह वैसी ही बात नहीं है ? क्योंकि प्रतिज्ञा की गई भूमि के मार्ग की तरफ संकेत दिखाने के द्वारा निश्चित तौर पर यह निर्देशक हमारे पूर्वजों को वहां ले आया था, उसी प्रकार यदि हम मसीह के वचन का अनुसरण मार्ग में करेंगे तो एक बेहतर प्रतिज्ञा की हुई भूमि की तरफ वह हमें दुख की इस घाटी से आगे ले जाएगा ।

46 हे मेरे बेटे, राह की सरलता के कारण हमें आलसी नहीं होना है; क्योंकि ऐसा ही हमारे पूर्वजों के साथ था; क्योंकि ऐसा ही उनके लिए बनाया गया था, कि यदि वे देखते तो जीवित रहते; ऐसा ही हमारे साथ है । मार्ग तैयार है, और यदि हम देखेंगे तो हम सदा के लिए जीवित रह सकते हैं ।

47 और अब, मेरे बेटे, देखो कि तुम इन पावन बातों का ध्यान रख सको, हां, ध्यान दो कि तुम परमेश्वर की तरफ देखो और जीओ । इन लोगों के पास जाओ और वचन का प्रचार करो, और शान्त रहो । मेरे बेटे, विदा हो ।